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When the morale of a married woman falls ?

#एक_शादीशुदा_औरत_का_मनोबल_कब_गिर_जाता_है?

जब वो मांग में सिंदूर आते ही लड़की से औरत बन जाती है।

जब वो शादी के तुरंत बाद दीदी से आंटी बन जाती है जबकि उसका पति दो बच्चों के बाद भी भैया ही बना रहता है।



जब शादी की अगली सुबह बेटे को आराम करने दिया जाता है और उसे रसोई में प्रवेश मिल जाता है।

जब उसकी हर ग़लती भी उसकी और उसके पति की हर ग़लती भी उसी की ग़लती कहलाती है।

जब उसका शादी से बाहर आकर्षण उसको तिर्यचरित्र बना देता है और उसके पति का आकर्षण उसके प्यार की कमी कहलाता है।

जब मायके आने के लिए किसी की इजाजत जरूरी हो जाती है।

जब मायके की यादों की उदासी को उसके काम ना करने का बहाना करार दिया जाता है।

जब जरूरत पड़ने पर ना वो पति से पैसे मांग पाती है और ना ही पिता से।

जब उसकी माँ उसे समझौता करने को कहती रहती है। और अपनी सफल शादी की दुहाई देती रहती है।

जब हर रात उसके साथ जबर्दस्ती होती है और वो किसी से कह नहीं सकती है क्योंकि पति का तो अधिकार हो जाता है।

जब ऑफिस से थक कर आने के बाद कोई पानी तक नहीं पूछता है।

जब रात को पति के बाद सोती है और सुबह पति से पहले उठती है।

जब अपने सपने/ख्वाहिशें भूल जाती है और कोई पुरानी सहेली उसको याद दिलाती है।

शादी सभी के लिए उतनी मीठी नहीं होती जितनी नज़र आती है। महिलाओं के लिए आज भी जीवन मुश्किल है।

वो जो महिला आप रोज़ अपने ऑफिस में देखते है और उससे उसकी आँखों के नीचे काले घेरे होने का कारण पूछते है, मत पूछिए। वो कभी नहीं बताएगी। और अगर बताती भी है तो आप कभी नहीं समझेंगे।

अरे भई! जिसे उसकी माँ ने नहीं समझा, आप क्या खाक समझेंगे?

ऐसे ही होता है। नजरअंदाज करो। हमने भी तो सहा है और तुमसे ज्यादा सहा है। अपने बच्चों के बारे में सोचों।

और भी जाने क्या-क्या बकवास दलीलों के रूप में सुनने को मिलती है।

महिलाओं के शांत चेहरों और फूल से हँसी के पीछे कौन-कौन से तूफ़ान गुज़र रहे होते है, आप कभी नहीं समझेंगे।

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